7 माह में जन्मी बेहद कमजोर बच्ची को 58 दिन के इलाज से मिला नया जीवन, जिला चिकित्सालय शहडोल के चिकित्सकों की टीम ने पेश की चिकित्सा सेवा की मिसाल

दैनिक भारती शहडोल। जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों की टीम ने 7 माह में जन्मी एक अति कमजोर नवजात बच्ची को 58 दिनों तक सतत निगरानी और बेहतर उपचार देकर नया जीवन दिया है। इस उपलब्धि के बाद परिजनों के साथ-साथ पूरे अस्पताल में खुशी का माहौल है। मामला जयसिंहनगर तहसील के ग्राम बाराछ का है। यहां की रहने वाली स्वरूपा सेन को 15 जुलाई को ब्यौहारी सिविल अस्पताल से गंभीर स्थिति में जिला चिकित्सालय शहडोल रेफर किया गया था। उस समय उनकी गर्भावस्था मात्र 7 महीने की थी। स्थिति नाजुक होने के कारण विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने तत्काल मोर्चा संभाला। जिला चिकित्सालय पहुंचने के एक घंटे के भीतर ही स्वरूपा ने एक नवजात बच्ची को जन्म दिया। जन्म के समय बच्ची का वजन काफी कम था और वह बेहद कमजोर थी। उसे तुरंत नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) में भर्ती किया गया। चिकित्सकों के अनुसार प्री-मैच्योर बेबी के जीवित रहने की चुनौती बहुत बड़ी होती है, क्योंकि उनके फेफड़े और अन्य अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। लेकिन जिला चिकित्सालय के शिशु रोग विशेषज्ञों, चिकित्सकों और स्टाफ ने हार नहीं मानी। 58 दिनों तक बच्ची को विशेष वार्मर में रखा गया तथा आवश्यक दवाएं, ऑक्सीजन सपोर्ट और मां के दूध के साथ पोषण दिया गया। संक्रमण से बचाने के लिए सभी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया गया। दिन-रात की निगरानी के बाद धीरे-धीरे बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार आने लगा। अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है, उसका वजन सामान्य हो गया है और वह अपनी मां के साथ किलकारी मार रही है। 58 दिन के लंबे इलाज के बाद जब स्वरूपा सेन ने अपनी स्वस्थ बच्ची को गोद में लिया तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे। स्वरूपा ने जिला चिकित्सालय के चिकित्सकों और स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी बच्ची को नया जीवन दिया है। उन्होंने बेहतर उपचार के लिए पूरी टीम को धन्यवाद दिया।

इनकी रही महत्वपूर्ण भूमिका

इस चुनौतीपूर्ण उपचार में चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। एसएनसीयू प्रभारी डॉ. सुनील कुमार हथगेल, डॉ. सुप्रिया, डॉ. कृष्णेंद्र, डॉ. बृजेश पटेल, नर्सिंग इंचार्ज एवं नर्सिंग ऑफिसर अर्पणा सिंह सहित समस्त नर्सिंग अधिकारियों और सपोर्ट स्टाफ का इसमें अहम योगदान रहा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश मिश्रा तथा जिला चिकित्सालय की सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ के नेतृत्व में यह उपलब्धि मिली। सिविल सर्जन ने कहा कि सरकार द्वारा जिला अस्पतालों में एसएनसीयू और एनआईसीयू जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे अब गंभीर नवजात शिशुओं का इलाज जिले में ही संभव हो पा रहा है। यह घटना शहडोल जिले के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की बड़ी उपलब्धि है

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