
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कोल इंडिया लिमिटेड में नॉन-एग्जीक्यूटिव से एग्जीक्यूटिव (माइनिंग डिसिप्लिन) विभागीय पदोन्नति के मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। WP-13123-2026 मनीष कुमार बनाम कोल इंडिया लिमिटेड में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने विभागीय पदोन्नति में अप्रतिबंधित माइनिंग सर्टिफिकेट (SMCC/FMCC) की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया था कि कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी कंपनियों SECL, WCL, NCL में लगभग 97% कर्मचारी ओपनकास्ट खदानों में सतही क्षेत्र में काम करते हैं। नियमानुसार भूमिगत (अंडरग्राउंड) खदान में काम करने का अनुभव होने पर ही अप्रतिबंधित सर्टिफिकेट SMCC/FMCC मिलता है। ओपनकास्ट में काम करने वाले हजारों योग्य कर्मचारी इस शर्त के कारण विभागीय परीक्षा में बैठने से ही वंचित हो जा रहे हैं, जिससे उनका प्रमोशन का अधिकार प्रभावित हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को बिना SMCC/FMCC सर्टिफिकेट की बाधा के विभागीय पदोन्नति परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए। यह अनुमति याचिका के अंतिम फैसले के अधीन होगी। जिन अभ्यर्थियों के पास पहले से यह सर्टिफिकेट है और जिन्हें पदोन्नति दी जा रही है, उनकी पदोन्नति भी इस याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी। इस आदेश से कोल इंडिया की सभी अनुषंगी कंपनियों में कार्यरत हजारों डिप्लोमा होल्डर माइनिंग कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जो वर्षों से ओवरमैन, माइनिंग सरदार के पद पर ओपनकास्ट में कार्यरत हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद नियत की है। इस मामले में अंतिम निर्णय कोल इंडिया की पूरी प्रमोशन पॉलिसी पर असर डाल सकता है।