
कोलकाता। कोल इंडिया लिमिटेड (सी आई एल) ने अपने कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लाभार्थियों के लिए कैशलेस इलाज की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और एकरूप बनाने के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एस ओ पी) जारी की है। मेडिकल डिवीजन के विभागाध्यक्ष डॉ. सोमसुभ्रो गुप्ता द्वारा 15 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालय आदेश संख्या सी आई एल/सी-5बी/मेड/2026/347 के अनुसार यह एसओपी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
इन अस्पतालों पर लागू होगी व्यवस्था
यह नई व्यवस्था केवल उन चुनिंदा एम्पैनल्ड अस्पतालों पर लागू है, जिनके बिलों का भुगतान कोल इंडिया मुख्यालय से केंद्रीय रूप से किया जाता है। इसमें अपोलो समूह के 38 अस्पताल, टाटा मेडिकल सेंटर कोलकाता, नारायणा इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज बेंगलुरु सहित सीजीएचएस पैकेज दरों पर सूची बद्ध अन्य 9 अस्पताल शामिल हैं।
मुख्य प्रावधान
नई एसओपी के अनुसार कैशलेस सुविधा केवल भर्ती होकर (इन-पेशेंट) इलाज कराने पर ही मिलेगी। इसके लिए संबंधित अनुषंगी कंपनी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी द्वारा जारी वैध रेफरल ऑर्डर या कैशलेस ऑथराइजेशन लेटर अनिवार्य होगा। एक रेफरल या ऑथराइजेशन एक ही एडमिशन के लिए मान्य होगा, हालांकि कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और हेमोडायलिसिस के मामले में पत्र में उल्लिखित सत्रों की संख्या तक यह मान्य रहेगा। भुगतान केवल रेफर की गई बीमारी के इलाज तक ही सीमित होगा। अतिरिक्त जांच या प्रक्रिया के लिए अलग से अनुमति लेनी होगी।कंपनी ने संचार व्यवस्था को भी स्पष्ट किया है। सभी पत्राचार केवल अनुषंगी कंपनियों के निर्धारित ई-मेल आईडी से ही मान्य होंगे। मरीज के नाम के साथ ई-मेल अस्पताल के आधिकारिक पते और पर भेजा जाएगा। वैध दस्तावेज मिलने के बाद ही मुख्यालय द्वारा अस्पताल को अनुमोदन ई-मेल भेजा जाएगा, जिसके बाद ही अस्पताल कैशलेस सुविधा शुरू करेगा। भुगतान मुख्यालय का वित्त विभाग सीधे अस्पताल को करेगा।
कार्यरत कर्मचारियों की प्रक्रिया
कार्यरत कर्मचारियों के लिए अनुषंगी कंपनी के सीएमओ/सीएमएस प्रभारी निर्धारित प्रारूप (अनुलग्नक-बी) में रेफरल ऑर्डर जारी कर उसे ई-मेल के माध्यम से अस्पताल और मुख्यालय को भेजेंगे।
सेवानिवृत्त लाभार्थियों की प्रक्रिया
सेवानिवृत्त लाभार्थियों के मामले में अपोलो, नारायणा और अन्य 9 अस्पताल पहले अनुषंगी कंपनी को उपचार योजना, अनुमानित खर्च और केस हिस्ट्री भेजेंगे। इसके बाद सीएमओ/सीएमएस प्रभारी द्वारा ऑथराइजेशन लेटर (अनुलग्नक-सी) जारी किया जाएगा, जिसमें स्वीकृत राशि का उल्लेख अनिवार्य होगा। टाटा मेडिकल सेंटर के लिए लाभार्थी को स्वयं मेडिकल कार्ड और पेशेंट इवैल्यूएशन समरी के साथ आवेदन करना होगा।
बिलिंग और अन्य शर्तें
बिलों के साथ मरीज या परिजन के हस्ताक्षर, रेफरल लेटर और अनुमोदन ई-मेल की प्रति लगाना अनिवार्य होगा। गैर-चिकित्सीय खर्च जैसे टॉयलेट सामग्री, फोन कॉल, लॉन्ड्री, भोजन आदि तथा कॉस्मेटिक सर्जरी और उच्च श्रेणी के कमरे का अतिरिक्त खर्च कंपनी वहन नहीं करेगी। सेवानिवृत्त मामलों में बिल स्वीकृत राशि से अधिक होने पर अतिरिक्त अनुमान भेजना होगा। यौन रोग, नशे से संबंधित बीमारी और जानबूझकर खुद को पहुंचाई गई चोट के मामलों में भुगतान नहीं किया जाएगा। आदेश में सभी अनुषंगी कंपनियों और अस्पतालों को निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।