
दैनिक भारती शहडोल। विकास खंड बुढ़ार के ग्राम पकरिया में अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र एवं किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में महिला किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, सघन खेती, सब्जी उत्पादन, जैविक कीट नियंत्रण और कृषि आधारित आजीविका के विकल्पों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मृगेंद्र सिंह ने कहा कि महिला किसान खाद्य सुरक्षा की आधारशिला हैं। वे फसल उत्पादन, पशुपालन, बीज संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, कटाई उपरांत गतिविधियों और मूल्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनका पारंपरिक ज्ञान और जलवायु अनुकूल खेती की पद्धतियां भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ और समावेशी बनाती हैं। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. ब्रजकिशोर प्रजापति एवं डॉ. दीपक चौहान ने कहा कि वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में मनाने का उद्देश्य कृषि-खाद्य प्रणाली में महिलाओं के योगदान को वैश्विक पहचान दिलाना और संसाधनों व आधुनिक तकनीक तक उनकी पहुंच मजबूत करना है। कार्यक्रम में परियोजना संचालक (आत्मा) ओ.एस. वर्मन एवं उपसंचालक ममता कुशवाहा ने उतेरा खेती की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि सिंचाई के सीमित साधन वाले क्षेत्रों में रबी में खाली रह जाने वाले खेतों के लिए यह बेहतर विकल्प है। वर्षा आधारित धान क्षेत्रों में कटाई से 10 से 15 दिन पहले अलसी, मसूर, मटरी एवं तिवड़ा के बीजों का छिड़काव करने से खेत की नमी से ही अंकुरण हो जाता है और किसान अतिरिक्त दलहन-तिलहन की उपज ले सकते हैं। वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी बुढ़ार साक्षी दुबे एवं कृषि विकास अधिकारी डॉ. कल्पना श्रीवास्तव ने कहा कि सब्जी आधारित फसल प्रणाली कम समय में नियमित आय का साधन है। उन्होंने कीट नियंत्रण के लिए नीमगिरी के अर्क के 5 प्रतिशत घोल, बैसिलस एवं स्यूडोमोनास जैसे जैविक उपायों के उपयोग की सलाह दी। रिलायंस फाउंडेशन के राजीव श्रीवास्तव ने खेती के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट, बकरी पालन जैसी सहायक गतिविधियां अपनाकर आय बढ़ाने पर जोर दिया।
