फल विक्रेता की पुत्री ने बिना कोचिंग नीट में हासिल की सफलता 

दैनिक भारती धनपुरी। कहते हैं कि सपनों की ऊंचाई संसाधनों से नहीं, बल्कि हौसलों से तय होती है। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है धनपुरी की होनहार बेटी परी जैन ने। नगर के फल विक्रेता प्रवीण जैन (बल्लू) की पुत्री परी ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक  11850 प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे धनपुरी, बुढ़ार और शहडोल जिले का गौरव बढ़ाया है। परी की सफलता इसलिए और भी प्रेरणादायक है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े शहर या महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। घर पर रहकर ऑनलाइन अध्ययन, नियमित स्व-अध्ययन, मॉक टेस्ट और अनुशासित दिनचर्या के बल पर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। सामान्य परिवार की इस बेटी ने साबित कर दिया कि सफलता का रास्ता सुविधाओं से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और कठिन परिश्रम से बनता है। परी ने अपनी सफलता से उन हजारों विद्यार्थियों में नई उम्मीद जगाई है, जो सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण खुद को पीछे समझने लगते हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, आत्मविश्वास अडिग हो और मेहनत पूरी ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती। बेटी की उपलब्धि से परिवार में उत्सव जैसा माहौल है। फल विक्रेता पिता प्रवीण जैन (बल्लू) की आंखों में बेटी की सफलता की खुशी साफ झलक रही है। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल उनकी बेटी की नहीं, बल्कि हर उस परिवार की है जो अपने बच्चों को शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ते देखना चाहता है। परी जैन की इस उपलब्धि पर जैन समाज, बुढ़ार और धनपुरी के नागरिकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों तथा शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। नगरवासियों का कहना है कि परी ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा को न बड़े शहरों की जरूरत होती है और न ही महंगी कोचिंग की यदि मन में जुनून हो तो सफलता स्वयं रास्ता बना लेती है। प्रेरणा बनी परी परी जैन की यह उपलब्धि सिर्फ एक परीक्षा में मिली सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रेरक कहानी है। उनकी सफलता आने वाले वर्षों में धनपुरी और आसपास के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह विश्वास मजबूत करेगी कि ष्मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।

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