विकासखंड के बेली महरोई में शिक्षकों का अकाल, कन्नाबहरा में स्वीकृत पद अधिक शिक्षक नियुक्त

दैनिक भारती बिरसिंहपुरपाली। आदिम जाति कल्याण विभाग के विद्यालयों में शिक्षकों की पद स्थापना में व्यापक भर्रेशाही उजागर होकर सामने आई हैं। पाली विकासखंड में एक ओर बेली माध्यमिक विद्यालय  जहाँ पर कक्षा 1 से 8 तक 102 छात्र अध्ययन रत है, इस विद्यालय में आज  सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहा है, वही पर दुसरी तरफ  पाली विकास खंड के ही  कन्नाबहरा विद्यालय में स्वीकृत पद से अधिक  शिक्षको की पद स्थापना ने आदिम जाति विभाग की कार्य शैली पर तीखे सवाल खड़े कर रहा है। बताया जाता है कि एक तरफ शिक्षकों का इस अकाल है कि प्राथमिक और माध्यमिक के लिए सिर्फ एक शिक्षक तो वही , दूसरी ओर अनुपात से अधिक शिक्षक पदस्थ करके रख दिया गया है। पाली विकास खंड के बेली माध्यमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक प्राथमिक खंड मु 72 आदिवासी छात्र और माध्यमिक में 30 छात्रों के साथ  हैं, 102 छात्र अध्ययन रत फिर भी अध्यापन के लिए  सिर्फ  एक शिक्षक । उसके ऊपर बी एल ओ,और छात्रावास का काम भी उन्ही शिक्षक के हवाले।  नियम के अनुसार यहां कम से कम  06 शिक्षकों की पद स्थापना   होनी  चाहिए।बिडम्बना ही कहा जाये की इसी आदिम जाति विभाग की कन्नाबहरा विद्यालय में  पहले से ही स्वीकृति पद भरे होने के बाद अतिरिक्त शिक्षक  पदस्थ कर दिया गया है। इसी तरह कन्नाबहरा के बगल के विद्यालय  महरोई आश्रम शाला पूरी तरह शिक्षक विहीन बनी हुई है और उसी से लगी अरहरिया दादर में सिर्फ एक शिक्षक पदस्थ हैं।  सूत्रों का कहना है कि कन्नाबहरा विद्यालय शहडोल के समीप और मुख्य मार्ग पर होने के कारण शिक्षक वहां पदस्थ होने के लिए विभाग की खुशामद करते हैं। नतीजा ये कि जहां पहले से शिक्षक हैं वहां भी नए भेजे जा रहे हैं। बेली के अभिभावकों का कहना है ष्एक शिक्षक 8 कक्षाओं को कैसे पढ़ाएगा? आदिवासी बच्चों की पढ़ाई से किसी को मतलब नहीं है।स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने कलेक्टर उमरिया से मांग की है कि पूरे विकासखंड में युक्तियुक्तकरण कर शिक्षकों का समान वितरण किया जाए। शिक्षक विहीन स्कूलों में तुरंत पदस्थापना हो, ताकि बच्चों का भविष्य बर्बाद न हो। शिक्षा विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।  प्राप्त किया है। सामान्य परिवार से आने वाली इस बेटी ने यह साबित कर दिया कि विषम परिस्थिति में सीमित संसाधन में भी मात्र यदि लगन , जसब और कठिन मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता अवश्य मिलती है । परी जैन की सफलता पर जैन समाज , बुढार नगर वासियों ने हर्ष व्यक्त किया।

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