
दैनिक भारती अनूपपुर। जिला मुख्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर शुक्रवार की रात उस समय बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब कोतवाली थाना से महज लगभग 150 मीटर की दूरी पर स्थित पंजाब नेशनल बैंक का सुरक्षा हूटर रात करीब 2.00 बजे से लगातार बजता रहा। हैरानी की बात यह रही कि घंटों तक सायरन गूंजता रहा,लेकिन न तो बैंक प्रबंधन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदारों ने कोई तत्परता दिखाई। लगातार बजते हूटर से आसपास के रहवासियों में दहशत का माहौल बना रहा।चोरी या किसी अन्य अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए स्थानीय लोगों ने स्वयं रातभर बैंक के आसपास निगरानी की।वहीं दूसरी ओर, तेज आवाज के कारण क्षेत्र के बुजुर्ग,बीमार,छोटे बच्चों वाले परिवार तथा उच्च रक्तचाप के मरीज पूरी रात सो नहीं सके। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब बैंक शहर के सबसे संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और कोतवाली की दूरी महज डेढ़ सौ मीटर है,तब भी घंटों तक बजते सुरक्षा अलार्म पर किसी की नजर क्यों नहीं पड़ी…? क्या रात्रिकालीन गश्ती दल ने इस मार्ग से गुजरना भी उचित नहीं समझा या फिर सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है…? यदि यह केवल तकनीकी खराबी थी,तब भी तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति स्पष्ट करना बैंक प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसी की जिम्मेदारी थी।लेकिन यदि किसी वास्तविक आपराधिक घटना के दौरान भी यही स्थिति रहती तो उसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते थे।यह घटना सुरक्षा तंत्र की संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन,पुलिस विभाग एवं बैंक के उच्च अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं,यह स्पष्ट करें कि रातभर हूटर बजने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई,रात्रिकालीन गश्त की वास्तविक स्थिति क्या थी और इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है। जनता का सवाल सीधा है,यदि कोतवाली के पास स्थित बैंक ही सुरक्षित नहीं दिखता,तो जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित बैंकों की सुरक्षा का भरोसा आखिर किसके भरोसे है….?