जब कलेक्टर बने बच्चों के ‘गुरुजी’, खिल उठे नन्हे चेहरों पर मुस्कान, सक्षम आंगनबाड़ी में पार्थ जायसवाल ने बच्चों से किया आत्मीय संवाद, पढ़ाया ‘क से कबूतर’ और ‘A for Apple’

दैनिक भारती शहडोल। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल का बच्चों के प्रति आत्मीय और सहज अंदाज उस समय देखने को मिला, जब वे ग्राम पंचायत कर्री स्थित सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कुछ समय बच्चों के बीच बिताया और अधिकारी की भूमिका से अलग हटकर स्वयं शिक्षक बनकर नन्हे-मुन्नों को पढ़ाया।
कलेक्टर को अपने बीच पाकर आंगनबाड़ी के बच्चों में भी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने बच्चों से बातचीत करते हुए उनकी पढ़ाई के बारे में जानकारी ली और कक्षा में बैठकर उन्हें हिंदी वर्णमाला के साथ अंग्रेजी के अक्षरों की जानकारी दी।

‘क से कबूतर’ और ‘A for Apple’ से गूंजी कक्षा

कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने बच्चों को ‘क से कबूतर’ और ‘A for Apple’ पढ़ाते हुए उनसे सवाल-जवाब भी किए। बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ कलेक्टर के सवालों के जवाब दिए।
कलेक्टर का यह सहज अंदाज बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। कुछ देर के लिए आंगनबाड़ी का वातावरण एक सामान्य कक्षा की तरह नजर आया, जहां जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी बच्चों के बीच शिक्षक की भूमिका निभाते दिखाई दिए।

बच्चों की पढ़ाई और पोषण व्यवस्था को करीब से देखा

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, उनकी पढ़ाई तथा पोषण व्यवस्था की जानकारी ली। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही बेहतर शैक्षणिक वातावरण और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है।

विधायक और कमिश्नर ने भी परखी भोजन की गुणवत्ता

आंगनबाड़ी निरीक्षण के दौरान जैयसिंहनगर विधायक श्रीमती मनीषा सिंह तथा कमिश्नर सुरभि गुप्ता भी मौजूद रहीं। अधिकारियों ने बच्चों के लिए तैयार किए गए भोजन को स्वयं चखकर उसकी गुणवत्ता का जायजा लिया।
भोजन की गुणवत्ता को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय अधिकारियों द्वारा स्वयं भोजन का स्वाद चखना व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने की संवेदनशील पहल के रूप में देखा गया। भोजन चखने के दौरान कमिश्नर सुरभि गुप्ता ने स्वाद में नमक कम होने की बात भी कही, जिससे भोजन की गुणवत्ता को लेकर मौके पर ही आवश्यक सुधार की ओर ध्यान गया।

बच्चों के बीच पहुंचकर प्रशासन ने दिया संवेदनशीलता का संदेश

कलेक्टर, कमिश्नर और विधायक की बच्चों के बीच सहज उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि योजनाओं का वास्तविक लाभ बच्चों और आम नागरिकों तक पहुंच रहा है या नहीं, इसे जमीन पर जाकर महसूस करना भी है।
सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के साथ कलेक्टर का शिक्षक के रूप में संवाद और अधिकारियों द्वारा भोजन की गुणवत्ता की स्वयं जांच किया जाना प्रशासन की जमीनी निगरानी, संवेदनशीलता और जवाबदेही को दर्शाता है।

नन्हे बच्चों के लिए यादगार बना दिन

आंगनबाड़ी में पढ़ाई के दौरान बच्चों की उत्सुकता और खुशी देखते ही बन रही थी। कलेक्टर के साथ बातचीत और उनके हाथों से पढ़ाई का यह अनुभव बच्चों के लिए निश्चित रूप से यादगार रहा।
प्रशासनिक पद की औपचारिकता से अलग बच्चों के बीच शिक्षक बनकर पहुंचे कलेक्टर पार्थ जायसवाल का यह अंदाज न केवल बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लेकर आया, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि बेहतर भविष्य की नींव बच्चों की शिक्षा, पोषण और संस्कारों से ही मजबूत होती है।

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