
दैनिक भारती धनपुरी। एसईसीएल में ओवरमैन ग्रेड-बी पदोन्नति को लेकर कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। पहली बार दो प्रमुख राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एटक) और अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ बीएमएस ने लगभग एक ही सप्ताह में अलग-अलग ज्ञापन भेजकर प्रबंधन पर दबाव बढ़ा दिया है। दोनों संगठनों का कहना है कि यदि वर्ष 2026 के श्रम-शक्ति बजट में ओवरमैन ग्रेड-बी के पर्याप्त पद स्वीकृत नहीं किए गए तो हजारों कर्मचारियों का कैरियर प्रभावित होता रहेगा।
सूत्रों के अनुसार, एसईसीएल के कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में माइनिंग सरदार वर्षों से ओवरमैन बनने की पात्रता पूरी कर चुके हैं, लेकिन स्वीकृत पदों की कमी और श्रम-शक्ति बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं होने से पदोन्नति प्रक्रिया लगातार टलती रही है। इसका असर कर्मचारियों के मनोबल के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। बीएमएस के महामंत्री सुजीत सिंह ने 3 अगस्त को निदेशक (मानव संसाधन) को भेजे पत्र में कहा है कि पिछले 10 से 12 वर्षों से माइनिंग सरदारों की ओवरमैन ग्रेड-बी में पदोन्नति लंबित है। संगठन का कहना है कि यह मुद्दा कंपनी स्तरीय औद्योगिक संबंध एवं संचालन समिति की बैठकों में कई बार उठाया गया और प्रबंधन की ओर से सकारात्मक आश्वासन भी मिला, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ। बीएमएस ने वर्ष 2026 के श्रम-शक्ति बजट में आवश्यक पदों का प्रावधान कर सभी पात्र कर्मचारियों को वन-टाइम पदोन्नति देने की मांग की है। दूसरी ओर एटक के कंपनी कल्याण मंडल सदस्य राजेश चंद्र शर्मा ने 5 अगस्त को भेजे ज्ञापन में कहा कि सोहागपुर क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्रों में ओवरमैन ग्रेड-बी के स्वीकृत पद बहुत कम हैं। जबकि ग्रेड-ए और ग्रेड-ए1 में अपेक्षाकृत पर्याप्त पद उपलब्ध हैं। शुरुआती स्तर पर पदों की कमी के कारण पूरी पदोन्नति श्रृंखला प्रभावित हो रही है। संगठन ने मांग की है कि खदानों की संख्या, उत्पादन और भविष्य की जरूरतों के अनुसार ग्रेड-बी के स्वीकृत पद बढ़ाए जाएं। दोनों संगठनों के ज्ञापनों में भले ही मांग रखने का तरीका अलग है, लेकिन मूल उद्देश्य एक ही हैकृपदोन्नति में वर्षों से चले आ रहे ठहराव को समाप्त करना। बीएमएस जहां लंबित पात्र कर्मचारियों को एकमुश्त पदोन्नति देने की मांग कर रही है, वहीं एटक स्थायी समाधान के रूप में ग्रेड-बी के स्वीकृत पदों में वृद्धि चाहती है, ताकि भविष्य में भी पदोन्नति नियमित रूप से होती रहे। कंपनी में वर्ष 2026 के श्रम-शक्ति बजट की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में कर्मचारियों और यूनियनों को उम्मीद है कि इस बार प्रबंधन ओवरमैन ग्रेड-बी के पदों में वृद्धि और लंबित पदोन्नतियों पर ठोस निर्णय ले सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसका लाभ एसईसीएल के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत बड़ी संख्या में माइनिंग सरदारों और पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को मिलेगा। दोनों ज्ञापन निदेशक (मानव संसाधन), एसईसीएल बिलासपुर को भेजे जा चुके हैं। समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। अब कर्मचारियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वर्ष 2026 के श्रम-शक्ति बजट और आगामी पदोन्नति प्रक्रिया में उनकी मांगों को कितना स्थान मिलता है।