बुढ़ार में आर्यिका गुरमति सहित 11 गुरु मां भव्य मंगल प्रवेशआ, ध्यात्मिक चेतना, संयम और संस्कृति की होगी दिव्य वर्षा

दैनिक भारती बुढार। हृदय सरल, तरल होगा तभी मनुष्य जीवन सफल एवं जीवंत बनेगा। जैसे नदी, तलब का पानी जब बर्फ बन जाता है तो मछलियों का जीवित रहना मुश्किर हो जाता है वैसे ही मनुष्य को जीवंत बने रहने के लिए सरल, तरल बनना होगा। उक्त उद्गार संबोधित करते हुए पूज्य आर्यिका रिजु मति जी ने बुढार अगवानी पर मंच से व्यक्त किए। 19  जुलाई  रविवार को प्रातः 7 बजे गुरुदेव विद्या सागर जी की शिष्या एवं वर्तमान आचार्य एक्सश्री समय सागर जी के आशीर्वाद से बुढार में चातुर्मास स्थापना हेतु  आर्यिका 105 रिजूमती गुरु मां अपने 10 आर्यिका संघ ने वासुपूज्य जिनालय धनपुरी से बुढार के लिए  गमन किया। लगभग 8 बजे बुढार नगर में जैब समाज बुढार के तमाम संगठन कमेटियों ने पूरे जोश  गाजे बाजे नगाड़ों से अगवानी की ।  जैन समाज के प्रसन्न जैन दीपू न्यवजनकारी देते हुए बताया कि पार्श्वनाथ जैन समिति, शांति नाथ जैन मनीर समिति, शक्ति सागर पाठशाला समिति, राजुल समिति,त्रिशला महिला मंडल,नवयुवक मंडल  ,सभी एक ड्रेसबमे लय बद्ध तरीके से अपनी पूज्य आराध्य मान की अगवानी में बढ़ चढ़ कर हिस्से दारी निभाते नजर आए। आचार्य समय सागर जी के आशीर्वाद से आर्यिका रत्न 105 श्री ऋजुमति माताजी, आर्यिका श्री सरलमति माताजी, आर्यिका श्री शीलमति माताजी, आर्यिका श्री असीममति माताजी, आर्यिका श्री गौतममति माताजी, आर्यिका श्री निर्वाणमति माताजी, आर्यिका श्री मार्दवमति माताजी, आर्यिका श्री मंगलमति माताजी, आर्यिका श्री चारित्रमति माताजी, आर्यिका श्री श्रद्धामति माताजी, आर्यिका श्री उत्कर्षमति माताजी के आगमन बुढ़ाई नगर में उल्लाह और हर्ष का वातावरण बना हुआ है नगर के दोनों मंदिरों को आकर्षित तरीके  से सजाया गया है नगर के मुख्य द्वारों को सजावट दुल्हन की तरह की गई है ताकि आगामी 4 महीना तक नगर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहे।

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