साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ जनमानस को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम अखिल भारतीय साहित्य परिषद की काव्य गोष्ठी मंे साहित्यकारों ने बांधा समां

दैनिक भारती शहडोल। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जिला इकाई शहडोल के तत्वावधान में गरिमामयी काव्य गोष्ठी का आयोजन साहित्यिक एवं आत्मीय वातावरण में आयोजित हुई । कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों एवं साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी सशक्त एवं भावपूर्ण रचनाओं का पाठ किया। देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएं, प्रकृति, संस्कृति एवं समकालीन विषयों पर आधारित कविताओं ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई के अध्यक्ष सुख निधान मिश्रा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ जनमानस को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम है। नियमित साहित्यिक आयोजनों से नई पीढ़ी में भाषा, संस्कृति और साहित्य के प्रति रुचि विकसित होती है तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति को नया मंच मिलता है। इस अवसर पर सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य आचार्य मृगेंद्र श्रीवास्तव का उनके शिक्षा एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षक एस. नंदन श्रीवास्तव द्वारा श्रीफल, कलम एवं सम्मान वस्त्र भेंट कर अभिनंदन किया गया। उपस्थित साहित्यकारों ने उनका पुष्पगुच्छ एवं शुभकामनाओं के साथ सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन शिरीष नंदन श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने साहित्य परिषद की गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों का संरक्षण एवं संवर्धन करना है। उन्होंने सभी साहित्यकारों से नियमित रूप से साहित्यिक गतिविधियों में सहभागिता का आह्वान किया। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि सीएल मिश्रा, साहित्यकार किरण सिंह शिल्पी, युवा कवि सीएल प्रताप सोनी, नवनीत शर्मा, डॉ. दुर्गा शंकर श्रीवास्तव, गजलकार राजिंदर सिंह राज, बृजमोहन सराफ बशर, मृगेंद्र श्रीवास्तव, शिवनारायण त्रिपाठी, शिरीष नंदन श्रीवास्तव, मानसी श्रीवास्तव, पीयूष श्रीवास्तव, मंजू श्रीवास्तव, शिल्पा श्रीवास्तव सहित अनेक साहित्यकारों एवं साहित्य प्रेमियों ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। कवियों की प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा तथा तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में सभी साहित्यकारों ने इस प्रकार की गोष्ठियों का नियमित आयोजन करने का संकल्प व्यक्त किया। उपस्थित जनों ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यिक चेतना को सशक्त बनाने के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों और रचनात्मक संवाद को भी नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *