राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान-2026 से संगीत निर्देशक शान्तनु मोइत्रा सम्मानित, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअली समारोह को किया संबोधित; बोले—लता जी के सुरों में जीवन के हर भाव की अभिव्यक्ति

इंदौर। सुप्रसिद्ध संगीत निर्देशक शान्तनु मोइत्रा को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वर्चुअल उपस्थिति में इंदौर में आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें यह अलंकरण प्रदान किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा प्रशस्ति पत्र का वाचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि भारत रत्न एवं स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के नाम पर स्थापित यह सम्मान देश-दुनिया के प्रतिष्ठित सम्मानों की श्रेणी में है। लता मंगेशकर की जन्मस्थली इंदौर होना मध्यप्रदेश के लिए गौरव और सौभाग्य की बात है।

लता जी ने हर भाव को सुरों में किया अमर

मुख्यमंत्री ने कहा कि लता मंगेशकर को दुनिया ने केवल एक महान गायिका के रूप में नहीं, बल्कि संगीत की ऐसी विलक्षण विभूति के रूप में स्वीकार किया, जिनके सुरों में जीवन के हर भाव की अभिव्यक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि लता जी के गीत भक्ति, देशभक्ति, प्रेम, दोस्ती, मस्ती और विरह जैसे जीवन के अनेक भावों को अभिव्यक्त करते हैं। उनके गायन में शास्त्रीय संगीत से लेकर सुगम, भक्ति और लोक संगीत तक अद्भुत विविधता दिखाई देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लता जी ने 30 से अधिक भाषाओं और बोलियों में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। उनके सुरों की शुद्धता और उच्चारण की स्पष्टता उन्हें विशिष्ट बनाती थी। राष्ट्रीय पर्वों और धार्मिक आयोजनों में उनके गीत आज भी लोगों के मन में गहरी भावनाएं जगाते हैं।

शान्तनु मोइत्रा की संगीत साधना को सराहा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मानित संगीत निर्देशक शान्तनु मोइत्रा की संगीत साधना की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी प्रतिभा से भारतीय संगीत जगत को समृद्ध किया है। उन्होंने मोइत्रा की चर्चित संगीत रचनाओं का उल्लेख करते हुए ‘बावरा मन देखने चला एक सपना’ जैसे गीत का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने उनके द्वारा प्रस्तुत शिव तांडव स्तोत्र और राम-सिया भजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली कलाकारों को सम्मानित करना मध्यप्रदेश के लिए गौरव की बात है और मालवा की धरती सदैव कला एवं प्रतिभाओं को सम्मान देने की परंपरा के लिए जानी जाती रही है।

लता जी के साथ काम करने का संस्मरण सुनाया

सम्मान प्राप्त करने के बाद संगीत निर्देशक शान्तनु मोइत्रा ने मध्यप्रदेश शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लता मंगेशकर की जन्मस्थली और उनके नाम से स्थापित सम्मान प्राप्त करना उनके लिए अत्यंत भावुक एवं गौरवपूर्ण क्षण है। मोइत्रा ने लता मंगेशकर के साथ स्टूडियो में काम करने का संस्मरण साझा करते हुए कहा कि चार पंक्तियों के गीत के लिए भी लता जी पूरी गंभीरता, तैयारी और समर्पण के साथ काम करती थीं। उन्होंने कहा कि लता जी से उन्हें अपने काम के प्रति ईमानदारी, अनुशासन और उत्कृष्टता की सीख मिली। उन्होंने कहा कि आज भी कोई गीत बनाते समय उनके मन में यह विचार आता है कि यदि लता जी इसे गातीं तो कैसा होता।

मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक परंपरा का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती महाकवि कालिदास और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जैसे महान रचनाकारों की परंपरा से समृद्ध रही है। साहित्य, संगीत, कला और फिल्म जगत की अनेक प्रतिभाओं का संबंध भी मध्यप्रदेश से रहा है। उन्होंने कहा कि ‘मेघदूत’ से लेकर आधुनिक रचनाधर्मिता तक प्रदेश की सांस्कृतिक यात्रा अत्यंत समृद्ध रही है।

संगीत संध्या ने बांधा समां

सम्मान समारोह के बाद संगीत संध्या का आयोजन किया गया। इसमें सचेत-परम्परा एवं उनके दल ने मधुर गीतों की प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद संगीत प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, संभागायुक्त भास्कर लाक्षाकार, कलेक्टर शिवम वर्मा, विधायक रमेश मेंदोला, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, विधायक मधु वर्मा, श्रवण सिंह चावड़ा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।

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