
छत्तीसगढ। 433 घरेलू और 38 व्यावसायिक सिलेंडर जब्त, नपा अध्यक्ष मुकेश दुबे की शिकायत के बाद जिला खाद्य अधिकारी की टीम ने की कार्रवाई। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (छत्तीसगढ)जिले की सियाराम गैस एजेंसी में लंबे समय से चल रही कथित अनियमितताओं और कालाबाजारी की शिकायतों पर आखिरकार खाद्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। उपभोक्ताओं को परेशान करने और निर्धारित मूल्य से अधिक दाम वसूलने की शिकायत पर विभाग की टीम ने एजेंसी के गोदाम में छापा मारकर कुल 471 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए हैं। कार्यवाही के दौरान जिला खाद्य अधिकारी श्रेवता अग्रवाल के नेतृत्व में खाद्य निरीक्षक राहुल सिंह राजपूत, अरविंद चंद्रा, आशीष पांडेय, नेहा पाटले और सोनू देवांगन की टीम मौजूद रही। टीम ने मौके पर सिलेंडरों की गिनती, स्टॉक और वितरण पंजी की जांच की।
कैसे हुई कार्रवाई – 433 घरेलू और 38 कमर्शियल सिलेंडर मिले
खाद्य विभाग के अनुसार जब्त किए गए सिलेंडरों में 14.2 किलोग्राम क्षमता वाले 433 घरेलू सिलेंडर शामिल हैं, जिनमें 87 सिलेंडर खाली और 346 सिलेंडर गैस से भरे हुए पाए गए। इसके अलावा 19 किलोग्राम क्षमता वाले 38 व्यावसायिक सिलेंडर भी जब्त किए गए हैं, जिनमें 36 खाली और 2 भरे हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडरों का गोदाम में जमा होना और समय पर वितरण न होना कालाबाजारी की ओर इशारा कर रहा है।
नपा अध्यक्ष की शिकायत पर हरकत में आया विभाग
बताया गया कि सियाराम गैस एजेंसी को लेकर पिछले कई महीनों से उपभोक्ता परेशान थे। लोगों का आरोप था कि एजेंसी द्वारा बुकिंग के बाद नंबर आने पर भी 4-5 दिनों तक सिलेंडर नहीं दिया जाता, जानबूझकर आपूर्ति में देरी की जाती है और निर्धारित सरकारी दर से अधिक राशि वसूली जाती है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को इस कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए गौरेला नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश दुबे ने जिला खाद्य अधिकारी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को लिखित शिकायत सौंपी थी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। उनकी शिकायत के बाद ही खाद्य विभाग ने यह छापामार कार्रवाई की।
स्टॉक रजिस्टर और रेट-लिस्ट भी नहीं मिली
जांच के दौरान खाद्य विभाग की टीम ने एजेंसी के स्टॉक रजिस्टर, वितरण पंजी, कैश मेमो और रेट-लिस्ट की मांग की, लेकिन मौके पर एजेंसी संचालक द्वारा कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका। यह भी पाया गया कि एजेंसी परिसर में उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित दर की सूची भी चस्पा नहीं की गई थी, जो कि नियमानुसार अनिवार्य है।
एलपीजी विनियमन आदेश 2000 के तहत मामला दर्ज
खाद्य विभाग ने यह पूरी कार्रवाई द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (प्रदाय एवं वितरण विनियमन) आदेश, 2000 के प्रावधानों के तहत की है। जब्त किए गए सभी 471 सिलेंडरों को सुपुर्दनामे पर दिया गया है और उनके क्रय-विक्रय, स्टॉक और वितरण से संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच में यदि कालाबाजारी और अधिक मूल्य वसूली की पुष्टि होती है तो एजेंसी संचालक के खिलाफ लाइसेंस निलंबन और एफआईआर तक की कार्रवाई हो सकती है।
मुकेश दुबे बोले – आम जनता का शोषण बर्दाश्त नहीं होगा
नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश दुबे ने कहा, गैस जैसी आवश्यक वस्तु में आम नागरिकों को परेशान करना और उनसे अवैध वसूली करना बेहद गंभीर मामला है। मेरे पास रोजाना 20-25 उपभोक्ता इसकी शिकायत लेकर आ रहे थे। मेरा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को परेशान करना नहीं है, बल्कि आम जनता को उनका हक दिलाना और गैस वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है। यदि एजेंसी दोषी पाई जाती है तो उसका लाइसेंस निरस्त करने तक की मांग की जाएगी। खाद्य विभाग की इस अचानक कार्रवाई के बाद जिले के अन्य गैस एजेंसी संचालकों में भी हड़कंप मचा हुआ है। उपभोक्ताओं ने विभाग की इस कार्रवाई का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब उन्हें समय पर और सही दाम पर गैस सिलेंडर मिल सकेगा।